कवर्धा विशेषछत्तीसगढ़ प्रादेशिक

विधानसभा में गूंजे पंडरिया के सवाल: पानी, स्कूल और वनांचल की बदहाली पर सरकार से मांगा जवाब

कवर्धा। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने अपने विधानसभा क्षेत्र से जुड़े कई अहम जनहित के मुद्दे सदन में उठाए। वनांचल और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में पेयजल संकट, नगरीय जल प्रदाय योजनाओं की स्थिति और कबीरधाम जिले के सरकारी स्कूलों की बदहाल अधोसंरचना को लेकर उन्होंने सरकार से विस्तृत जवाब मांगा। सरकार के लिखित उत्तर में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं।

वनांचल में जल संकट पर सरकार का जवाब

विधायक भावना बोहरा ने सवाल उठाया कि पंडरिया विधानसभा के तेलियापानी लेदरा, बिरहुलडीह, कांदावाणी, छिंदीडीह, सेन्दुरखार, अमनिया, भेलकी सहित 35 से अधिक वनांचल एवं आदिवासी बहुल गांवों के करीब 2,500 परिवार अब भी सुरक्षित पेयजल से वंचित हैं और प्राकृतिक जलस्रोतों पर निर्भर हैं।

इस पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने लिखित जवाब में कहा कि संबंधित परिवार सुरक्षित पेयजल से वंचित नहीं हैं। उन्होंने बताया कि कई गांवों में सोलर आधारित जल योजनाएं, सिंगल विंडो योजना और रेट्रोफिटिंग के कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि बसुलाटोला, तेलियापानी धोबे, कोटपानी, बाहपानी, रुखमीदादर, कांदावानी, सारपानी, मजगांव, देवानपटपर, छिंदीडीह, पंडरीपानी, सेन्दुरखार और सरईपानी सहित कई गांवों में कार्य निर्माणाधीन हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जल जीवन मिशन 2.0 के तहत नई कार्ययोजना बनाई जा रही है, लेकिन योजनाएं कब तक पूरी होंगी, इसकी समय-सीमा अभी तय नहीं है।

पंडरिया की योजना पूरी, पांडातराई की अब भी अधूरी

नगरीय जल आवर्धन योजना को लेकर पूछे गए प्रश्न के जवाब में सरकार ने बताया कि नगर पालिका पंडरिया में 8.32 करोड़ रुपये तथा नगर पंचायत पांडातराई में 3.75 करोड़ रुपये की जल आवर्धन योजनाएं स्वीकृत की गई थीं।

सरकार के अनुसार पंडरिया में योजना के सभी कार्य पूरे हो चुके हैं। 15 वार्डों में पाइपलाइन विस्तार, बोरवेल, सबमर्सिबल पंप, क्लोरीनेशन यूनिट और अन्य कार्यों से 2,170 परिवारों को सीधा लाभ मिल रहा है, जबकि अन्य वार्डों में भी बोरवेल के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है।

हालांकि पांडातराई को लेकर सरकार ने स्वीकार किया कि जल आवर्धन योजना अभी पूरी तरह चालू नहीं हो सकी है। सम्पवेल चालू नहीं होने और राइजिंग मेन पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण योजना प्रभावित है। फिलहाल 24 बोरवेल, 45 हैंडपंप, 10 स्टैंड पोस्ट और 620 नल कनेक्शनों के माध्यम से लगभग 2,066 परिवारों को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।

कबीरधाम के 21 स्कूलों तक पहुंचना भी चुनौती

स्कूल शिक्षा से जुड़े प्रश्न में विधायक भावना बोहरा ने विद्यालयों तक पहुंच मार्ग और जर्जर भवनों की स्थिति पर सरकार से जानकारी मांगी।

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने सदन में बताया कि पिछले तीन वर्षों में कबीरधाम जिले के विद्यालयों की अधोसंरचना और पहुंच मार्ग का कोई व्यापक सर्वे नहीं कराया गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि जिले में 21 विद्यालय ऐसे हैं, जहां पहुंच मार्ग नहीं है या अत्यंत जर्जर स्थिति में है।

106 स्कूल भवन जर्जर घोषित

सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि कबीरधाम जिले में वर्तमान में 106 विद्यालय भवन जर्जर अथवा अनुपयोगी घोषित किए जा चुके हैं। हालांकि इनके पुनर्निर्माण अथवा मरम्मत के लिए कोई विस्तृत समयबद्ध कार्यक्रम सदन में प्रस्तुत नहीं किया गया।

विधानसभा में उठे इन सवालों ने वनांचल क्षेत्रों की मूलभूत सुविधाओं, नगरीय पेयजल व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था की जमीनी स्थिति को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब नजर इस बात पर है कि सदन में दिए गए जवाबों के बाद इन समस्याओं के समाधान की दिशा में कितनी तेजी से काम आगे बढ़ता है।

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